भ्रमण बच्चों के ज्ञान को और बढ़ाएगा और भविष्य में उन सभी के लिए लाभकारी भी साबित होगा… सेंटर हेड कविता शर्मा
नवापारा राजिम :- श्री मानव रचना एजुकेशन सोसायटी अंतर्गत संचालित स्थानीय दावड़ा इंटरनेशनल स्कूल पटेवा व राजिम के बच्चों ने शनिवार को प्रदेश की प्रसिद्ध एतेहासिक नगरी सिरपुर धाम व एमएम फन सिटी का भ्रमण किया. संस्था के नर्सरी से पाँचवी तक के बच्चे मनोरंजन के लिए नया रायपुर स्थित फन सिटी का सैर किये तों छटवी से बारहवी तक के बच्चे पुरातात्विक नगरी सिरपुर धाम भ्रमण हेतु पहुंचे.

यहाँ बच्चों ने विश्व प्रसिद्ध 6-7 वीं सदी में ईंट से निर्मित लक्ष्मण मंदिर का दर्शन किया. लक्ष्मण मंदिर बनावट व नक्काशी देखकर बच्चे काफ़ी आश्चर्यचकित हुए. इसके अलावा स्कूली बच्चों ने लक्ष्मण मंदिर स्थित कैंपस में स्थित तीन प्रमुख म्युजियम का भी भ्रमण किया और महत्वपूर्ण जानकारिया प्राप्त की. यहा म्युजियम में सिरपुर में खुदाई से प्राप्त प्राचीन मूर्तियों के अवशेष, शिवलिंग आदि को बारीकी से देखा और उस समय की बनावट व शिल्पकला से रूबरू हुए. म्यूजियम पश्चात बच्चों ने गन्धेश्वर महादेव मंदिर का दर्शन किया और भगवान का आशीर्वाद लिया. इस भ्रमण यात्रा में दोनों ही संस्था से 200 से ज्यादा बच्चे व स्कूली स्टॉफ उपस्थित थे.


भ्रमण को लेकर संस्था की सेंटर हेड श्रीमती कविता शर्मा ने कहाकि संस्था द्वारा हर वर्ष इस तरह से पिकनिक व शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन कराया जाता हैं, जहाँ बच्चे एक दिन आसपास किसी भी एतेहासिक व मनोरंजन वाले जगह में जाते है और सीखने के अलावा यहाँ से भी जुड़ी अन्य चीजों की जानकारी प्राप्त करते हैं. इससे बच्चों को मानसिक शांति तों प्राप्त होती हैं, साथ ही ज्ञान वर्धक बातों की जानकारी भी पता चलती हैं. उन्होंने दावा किया कि यह भ्रमण बच्चों के ज्ञान को और बढ़ाएगा और भविष्य में उन सभी के लिए लाभकारी भी साबित होगा.


उक्त सफल आयोजन के लिए श्री मानव रचना एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष प्रकाश दावड़ा व दावड़ा इंटरनेशनल स्कूल व कॉलेज ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती प्रगति दावड़ा मिरानी ने बधाई देते हुए इसे अनुकरणीय व यादगार बताया. आयोजन को सफल बनाने में संस्था की सेंटरहेड श्रीमती कविता शर्मा, प्राचार्य श्रीमती यास्मीन खान, प्रशांत दीप, कोऑर्डिनेटर देवेंद्र साहू, हरजाब कौर सहित एडमिन व शिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा.


मंदिर की विशेषता
सिरपुर स्थित लक्ष्मण मंदिर भारत के इष्टिका (ईटों) निर्मित मंदिरो में सबसे महत्वपूर्ण है। अभिलेख में इसे हरि अर्थात विष्णु मंदिर के रूप में स्थापित बताया गया है। इसका निर्माण महान पाण्डुवंशीय शासक हर्षगुप्त की पत्नी एवं महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता महारानी वासटा ने अपने पति की स्मृति में कराया था।
पूर्वाभिमुख यह मंदिर छः फीट ऊँचे अधिष्ठान पर निर्मित है। मंदिर का निर्माण पंचरथ संयोजन में हुआ है। इस मंदिर के भू-संयोजन में गर्भगृह, अन्तराल एवं स्तम्भं युक्त मण्डप के अवशेष दृष्टिगोचर होते है। पंच शाखा प्रकार के इस द्वार में क्रमशः पत्र शाखा, रत्नशाखा, मिथुन शाखा पुनः पत्र शाखा तथा दशावतार शाखायें हैं, जिसमें वराह, कूर्म, मत्स्य आदि का अंकन किया गया है। गर्भगृह के ललाट बिम्ब पर शेषशायी विष्णु का अंकन है। शिरदल पर दायीं ओर हयग्रीव व बांयी ओर केशी वध का चित्रण है। मंदिर से प्राप्त अभिलेख की लिपि एवं शैलीगत निर्माण के आधार पर इसकी तिथि लगभग सातवीं शताब्दी ईस्वी स्वीकार की जाती है।